Vaccinating Goats Against ET and TT



Vaccinating Goats Against ET and TT

बकरियो को एंटरोटॉक्सिमिया और टेटनस का टिकाकरण करना चाहिये या नही ?

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नमस्कार दोस्तो, बकरीपालन में बकरियोको को टिकाकरन का काफी महत्व होता है। इंग्लिश में इसे Goat Vaccination कहते है। Goat Vaccination बकरीपालन में काफी जरूरी होता है। बकरीपालन व्यवसाय में बकरियो को होनेवाली संक्रामक बीमारियों के रोकथाम के लिए Goat Vaacination Shedule बनाया गया है। जिसकी मदत से बकरी पालक Vaccination Shedule की मुताबिक़ टिकाकरण कर सके।
दोस्तो, आज मैं आपको बकरियो को होनेवाली ET ( एंटरोटॉक्सिमिया) और TT (टेटनस) के Vaccination के बारे में विस्तार से बतानेवाला हु। आमतौर पर यह सलाह दी जाती है कि सभी बकरियों (एंटरॉक्सिमिया) और TT(टेटनस) रोग के खिलाफ टीका लगाया जाए। लेकिन ज्यादातर बकरी पालक ये Vaccination नही करवाते और इन दोनो बीमारीको नजरअंदाज कर देते है। लेकिन समझनेवाली बात ये है कि ये दो बीमारी बकरियो की जानभी ले सकती है।

ET ( एंटरोटॉक्सिमिया) और TT (टेटनस) बीमारीका कारण

ET ( एंटरोटॉक्सिमिया) और TT (टेटनस) इन दोनों बीमारियों में जानवरों और पर्यावरण में मौजूद क्लॉस्ट्रिडियल बैक्टीरिया जिम्मेदार होता है। एक समय आप बकरियो को कम चारा खिलाकर ET बीमारी मो कंट्रोल कर सकते है, मगर टेटनस TT का टिकाकरण नही किया तो बकरीयो को मुसीबत हो सकती है। क्लॉस्ट्रिडियल बैक्टीरिया आम तौर पर जमीन के अंदर सुप्ता अवस्था मे रहता है। वैसे ये Bacteria सभी भेड और बकरियो को पेट मे होता है लेकिन इस Bacteria के ज्यादा मात्रा में बढ़ने से ये बीमारी में तबदील करता है ।

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What is overeating disease (enterotoxemia)?एंटरोटॉक्सिमिया बीमारी क्या है।

ज्यादमात्रा में चाराखाने से एंटरोटॉक्सिमिया बीमारी कहा जाता है। यह एक घातक बीमारी है जो सभी उम्र की बकरियों को प्रभावित करती है। नवजात और युवा भेड बकरी के बच्चोमे यह रोग अधिक घातक होता है, और अक्सर उन बकरी के बच्चो को अपने चपेट में लेता है जो काफी खाते है और चंचल है। एंटरोटॉक्सिमिया बीमारी को ET भी कहा जाता है, इस बीमारी के लिए ET के Goat Vaccination होते है इसलिए इसे ET कहा जाता है, 
ये बीमारी क्लॉस्ट्रिडियम पेर्फिंगेंस्टीप्स बैक्टीरिया सी और डी के कारण होती है। ये जीवाणु आमतौर पर मिट्टी में पाए जाते हैं, और अधिकांश सामान्य बकरियों की आंतों में भी मौजूद होते हैं।

क्लॉस्ट्रिडियल बैक्टीरियल जीवों की घातक क्रिया बैक्टीरिया की विषारी पदार्थों को उत्पन्न करने की क्षमता से संबंधित है जो सदमे और तंत्रिका लक्षण (प्रकार डी) का कारण बनती है, या (प्रकार सी) के साथ आंत और दस्त के आंतो की सूजन हो जाती है।
इस बीमारी में बकरियो की आंत में क्लॉस्ट्रिडियल बैक्टीरिया तेजी से उच्च स्तर तक बढ़ता है और जहर उत्पन्न करना शुरू करता है। क्लॉस्ट्रिडियल जीवाणु की बढ़त के लिए बकरियो को ज्यादा मात्रा में अनाज या "समृद्ध" फ़ीड खिलाना खासकर जब जानवर फ़ीड के आदी नहीं होते हैं। या फिर बकरियोके रोजाना आहार में अचानक तबदीली करना इन करनोसे ये जीवाणुकी संख्या बकरियो के पेट मे अचानक बढ़जाती है।
इसलिए बकरियो को कोई भी नई खुराक या चारा शुरू करने से पहले धीरेधीरे कमकम मात्रा में बकरियो को उस खुराक या चारे के प्रति आदि बनवाया जाना चाहिए, एकबार बकरिया उस खुराक या चारे के प्रति आदि हो जाये तो खुराक या चारे की मात्रा बढ़ानी चाहिए।

Goat Kids Feeding Method

बकरी के बच्चोंको बकरी का दूध भी ज्यादा पिलाने से क्लॉस्ट्रिडियल बैक्टीरियल  अपना रंग दिखता है और बच्चा इस बीमारी के चपेट में आजाता है। इसलिए बकरी के बच्चो को दूध जब उसे भूख लगे तभी पिलाना चाहिए और एक बार पिलाने के बजाय दिन में तीन या चार बार थोड़ा थोड़ा दूध पिलाना चाहिए।

ET ( एंटरोटॉक्सिमिया) बीमारी के लक्षण क्या हैं?

ET ( एंटरोटॉक्सिमिया बीमारी से जुड़े कई अलग-अलग लक्षण हैं। इस बीमारी में बिना कोई लक्षण दिखे अचानक बकरियों की मृत्यु हो सकती है। अन्य लक्षणों में न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका प्रणाली से जुड़े) संकेत शामिल हैं। इनमें दांत पीसने, बुखार, सूजन पेट,खून की दस्त और कुछ घंटों के भीतर मौतभी हो सकती है।

टेटनस (TT) क्या है?

टेटनस एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है क्लोस्ट्रीडियम टेटानी जीवाणु द्वारा होती है। यह बैक्टेरिया मिट्टी और जानवरों के खाद में के रहते है।टेटनस का बैक्टीरिया बकरियो या भेड को, कान टैगिंग, बकरो को खस्सी करते समय, बकरो के सींग काटते समय या बकरीयो के डिलिव्हरी के समय इत्यादि माध्यमसे घावों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप 4 से 21 दिनों बाद रोग का संकेत मिलता है। ये बैक्टीरिया सीधे बकरियो के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।

Vaccinating Goats Against ET and TT

टेटनस बीमारी के लक्षणों में कठोर मांसपेशिया होना, नाक बहना, खड़े / कठोर कान और  बकरियो के खड़ी पूंछ शामिल हैं। इसके अलावा, प्रभावित जानवरों को अपने मुंह खोलने में मुश्किल होती है, इसलिए बीमारी को "लॉकजॉ" शब्द दिया गया है। इस बीमारी से ग्रासि जानवर अधिक उत्तेजीत हो सकते हैं। आखिरकार, प्रभावित जानवर मर सकते हैं।

What dosage should be used and when should goats be vaccinated? ET और TT का Vaccination कब और कैसे दे।

Tetanus Vaccine

Enterotoxemia Vaccine

टिकेपे लिखे निर्देश या पशुचिकिस्तक की सलाह से ये टिकाकरण करना चाहिए
क्लॉस्ट्रिडियम परफ्रेंसेंस प्रकार सी और डी + टेटनस (सी-डी-टी)
खुराक: लेबल निर्देशों को पढ़ें और उनका पालन करें क्योंकि निर्माताओं के बीच खुराक थोड़ा अलग है।


बकरे को साल में एक बार.

गर्भवती बकरियो को बच्चे देने के 4 से 6 सप्ताह पहले। गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण करके, कोलोस्ट्रम के माध्यम से बच्चों को कुछ प्रतिरक्षा मिल जाती हैं।

बच्चे समय और खुराक के लिए टीका लेबल निर्देशों का पालन करें, क्योंकि दोनों निर्माताओं के बीच थोड़ा अलग हैं।

अगर गर्भवती बकरियो ये Vaccination डिलिव्हरीं के पहले  किया गया है,बकरी के बच्चे देने के बाद बच्चो को 8 सप्ताह की उम्र में टीकाकरण करना चाहिए और इसके बाद 21 से 28 दिन बाद बूस्टर Vaccination करना चाहिये।
यदि गर्भवती बकरियो को ये Vaccination डिलिव्हरी के पहले नही दिया गया होतो. डिलिव्हरी के बाद बच्चो को 2 सप्ताह की उम्र में Vaccination करना चाहिये और Booster Vaccination 
21 से 28 दिन बाद दिया जाता है।
इंजेक्शन कैसे दिया जाना चाहिए, और कहां?

How should injections be given, and where? ये टिकाकरण कैसे और कहा दे।

क्लॉस्ट्रिडियम परफ्रेंसेंस प्रकार सी डी / टेटनस और बहुविकल्पीय क्लॉस्ट्रिडियल टीके दोनो sub-cutaneous or intramuscula पद्धतिसे दिए जाते हैं।

Is there a slaughter withdrawal time? टिकाकरण के बाद क्या बकरोको कब मांस के लिए काटना है?

Vaccination के लेबल दिशाओं को पढ़ें और उनका पालन करें। लेकिन, हाँ, इन टीकों के लिए टीकाकरण और मांस के लिए काटना या कुर्बानी, बलिदेने के बीच आम तौर पर 21 दिन की प्रतीक्षा करनी चाहिए।

Vaccinating Goats Against ET and TT Vaccinating Goats Against ET and TT Reviewed by Nitesh S Khandare on November 10, 2018 Rating: 5

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